कुछ दर्द ..सुलगते अंगार से
रखे हैं दिल में ....
उबल रहा है स्मृतियों का लावा
राख कर देने की हद तक
आकुल है परित्यक्त अंतस ..
वेदना की लपटों के हाहाकार से
धधक रहे हैं कुछ पल
अस्तित्व लील जाने को आतुर
मैंने भी दरवाज़े पर
चिपका दी है एक चेतावनी
फ़ना होने का दम रखना
तभी भीतर कदम रखना .
फ़ना होने का दम रखना
जवाब देंहटाएंतभी भीतर कदम रखना .............वाह फ़ना तो हम पढ़कर ही होगये बेहद लाजवाब तुलिका ......!!
सरोज दी..... हौसला अफजाई का शुक्रिया ....आप लोगों को पढ़ कर जोर आज़माइश करते रहते हैं बस
हटाएंफ़ना होने का दम रखना
जवाब देंहटाएंतभी भीतर कदम रखना .
तुम्हें कोई चेतावनी रोक सकती है भला
हटाएंफ़ना होने का दम रखना
जवाब देंहटाएंतभी भीतर कदम रखना .....वाह!!
तूलिका,अगर कोई अनपढ़ हो या...प्यार में अंधा हो..और उसे यह चेतावनी दिखे न...तब?
ओये ऐसे सवाल नहीं पूछे जाते ...वैसे पूछा है तो बता दूं .......आग लग जाएगी पूँछ में :D
हटाएंमहत्वपूर्ण चेतावनी है.
जवाब देंहटाएंइसीलिए तो दरवाज़े पर लिखी है
हटाएंलाजबाब प्रस्तुतीकरण..
जवाब देंहटाएंशुक्रिया शांति जी
हटाएंkya khoob likha hai aapne.... wah... bahoot khub..
जवाब देंहटाएंशुक्रिया दिनेश जी
हटाएं