शनिवार, 2 जून 2012

पेशानी पर चाँद

 



















चाँद को बस एक बार
पेशानी पर सजाया था
उमर भर का दाग हो गया ...
माथे की लकीरों में भी
इक अगन उतर आयी है .

सबके लेखे में

कहाँ होती है चाँद की रोशनी...
सारे ग्रह-नक्षत्र सही राह चल भी दें
पर चाँद की फ़सल नहीं काट पाते.

किस्मत के सितारे जो रोपने हों

तो चाँद का सीना मत खोदना
कलेजे पर लगी चोट का
अंदाज़ा तो होगा ही तुम्हें...

टांग देना चाँद को

हथेलियों से गोल करके
आसमान के ब्लैक-बोर्ड पर
लाईट हाउस सा चमकेगा
तो सितारे किस्मत की राह
ढूंढ पायें शायद ...

17 टिप्‍पणियां:

  1. टांग देना चाँद को
    हथेलियों से गोल करके
    आसमान के ब्लैक-बोर्ड पर
    लाईट हाउस सा चमकेगा
    तो सितारे किस्मत की राह
    ढूंढ पायें शायद ...उफ़ अदभुत पंक्तियाँ ! बहुत सुन्दर बहुत ही सुन्दर रचना तुलिका !!

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  2. किस्मत के सितारे जो रोपने हों
    तो चाँद का सीना मत खोदना
    कलेजे पर लगी चोट का
    अंदाज़ा तो होगा ही तुम्हें...

    किस्मत के सितारों को अपने दामन में ही टांके
    तो शायद कुछ टांकों की चुभन भी महसूस हो ....!!

    बहुत सुंदर ....!!

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    1. पूनम जी शुक्रिया ...पसंद करने के लिए

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  3. टांग देना चाँद को
    हथेलियों से गोल करके
    आसमान के ब्लैक-बोर्ड पर
    लाईट हाउस सा चमकेगा
    तो सितारे किस्मत की राह
    ढूंढ पायें शायद ...ख्याल अच्छा है

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    1. बहुत शुक्रिया ..रश्मिप्रभा जी

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  4. बहुत ही खुबसूरत और प्यारी रचना..... भावो का सुन्दर समायोजन......

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  5. टांग देना चाँद को
    हथेलियों से गोल करके
    आसमान के ब्लैक-बोर्ड पर
    लाईट हाउस सा चमकेगा .................मुझे तो इतने सुंदर लिखे की तारीफ करना भी नहीं आता | चाँद खुश होगा इस तजुर्बे से ....मैं तो हूँ ही छुटकी |

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    1. चाँद खुश हो न हो ...मैं ज़रूर खुश हो गयी हूँ आपकी तारीफ़ से

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. तूलिका.....अच्छा लिखा है...तूलिका मार्का है.बिम्बों की खूबसूरती ,नयापन अच्छा लगा .सितारे किस्मत की राह जल्द से जल्द ढूंढें..अपनी जल बुझ से तुम्हें और परेशां न करें..यही दुआ है.ऐसा ही लिखती रहो ,हमेशा.
    तुम्हारी इस कविता को पढ़ के जो मन में आया वो लिखे दे रही हूँ...तुम्हारी हर बात से उलट..हर बात को नकारता हुआ .
    शायद ...
    सही कहा तुमने ...शायद
    किसी चीज़ का कोई भरोसा नहीं है
    और फिर इस मुए चाँद का तो कतई नहीं
    रोज तो घटता बढ़ता रहता है .

    चाँद को तुम टांगना
    हाथ से गोल कर .
    मुझे जो जैसा है
    वैसा पसंद है .
    मुझे बदलाव मंजूर नहीं
    काटना छांटना बस का नहीं .

    किस्मत के सितारे
    होते गर साथ हमारे
    तो यह हाल ही होता क्यूँ
    मैं उसको ,वो मुझको
    खोता ही क्यूँ ????

    जो मेरा है,हर हाल मिलेगा मुझे
    किसी सर्च लाईट की ज़रूरत नहीं
    सितारों पे यकीन की ज़रूरत नहीं
    बस अपने प्यार पे यकीन है,मुझे .

    दाग और चोट मिलें तो मिल जाएँ
    उनसे कोई गुरेज नहीं
    बस इतनी सी अरज है
    कि तुम भी मिल जाओ ,कभी .

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    उत्तर
    1. बस इतनी सी अरज है
      कि तुम भी मिल जाओ ,कभी ....
      .
      तुम्हारी दुआओं का साथ बना रहे ...आमीन !

      हटाएं

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