सोमवार, 29 अक्तूबर 2012

संदेसे

















हवाओं पर रख दिए थे
भीगे हुए से कुछ स्वर
और बता दिया था
उसके कानों का पता भी
जैसे पता ही था तुम्हें
कि स्वर का अनुनाद
इतने गहरे निशान छोड़ेगा
कि कालखंडों के बीतने पर भी
ह्रदय पर अंकित रहेंगे
स्वर के जीवाश्म

दरिया के पानियों पर
उसने भी रख दिए थे
प्रतीक्षा के दो आंसू
जैसे मालूम था उसे
दरिया का रास्ता
समंदर तक
और तय करनी थी उसे ही
समन्दर में नमक की सांद्रता
कि इससे ठीक पहले
मीठा था समन्दरों का भी पानी .


मंगलवार, 23 अक्तूबर 2012

मन की सीपियाँ

















मन की सीपियों में
कुछ कमी सी

कसकती रही

रेत कनों की तरह
..
और यादें

लगाती रहीं अनवरत

चमकीले वरक

रेत के उन कनों पर
...
जीवन सागर के

तेज़ थपेड़े

करते रहे पूरी कोशिश

फेंक देने को सीपियाँ

अपरिचय के

अनजान द्वीपों पर
...
वक्त की लहरों ने भी

अतल गहराइयों में डुबोया

बार बार पटका

कठोर चट्टानों पर
...
लेकिन सीपियों ने

अब भी

बचा रक्खे हैं

याद के चमकीले मोती

अपने अंतस में

सुरक्षित
!!

बुधवार, 17 अक्तूबर 2012

कुछ यादें कुछ सपने














कुछ यादें कुछ सपने अपने
थाती हैं जीवन की

बक्से में कुछ तस्वीरें और

पाती है प्रियतम की
.

आँखों भर आकाश खुला हो

औ परवाज़ मिली हो

उम्मीदों के रस्ते गलियाँ

हर इक राह खुली हो
.

सपनों के ताने बाने और

यादों के कुछ टांके

जीवन भर में क्या क्या पाया

मोल इन्हीं से आंकें
.

सपनों के बिन सूनी आँखें

यादों बिन अपना मन

सूनी साँसें सूनी बातें

सूना सारा जीवन
.

कुछ चित्र ये भी