मंगलवार, 5 जून 2012

रंगों का दरिया

 


















लड़की कस के पकड़ लेती 
उँगलियों  में अपना ब्रश 
सारे  गहरे रंग समेट ..
ब्रश  की नोक पर लगा लेती.
हवा में हाथ उठाती 
रंग छिड़कती ..कोशिश करती 
कुछ खींचने की ..कुछ आंकने की ..
आड़ी तिरछी लकीरों में घुले रंग 
कोई आकार लें..उससे  पहले 
लड़का अपने हाथ हवा में उठाता 
सारे रंग समेट लेता 
अपनी हथेलियों में ..
सिद्धहस्त जादूगर की तरह 
रंगों का दरिया वापस बहा देता....

क्षितिज  के एक कोने से दूसरे कोने तक
बिखर जाते रंग ...इन्द्रधनुष से 
कुछ देर दोनों जादू बुनते ....
पर रंग तो दिखाई देते हैं न रोशनी में ..
वो उठकर रोशनी का स्विच बंद करना चाहती 
पर उंगलियां फिर रंग में डूब जातीं ....

तब से उसने आँखें बंद की हुई हैं 
उसकी आँखों में बंद है एक इन्द्रधनुष ...
जबकि लड़के के हाथ 
अब भी उठे हैं ...
दुआएं बिखेर रहे हैं !





23 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!!!

    कुछ देर दोनों जादू बुनते ....
    पर रंग तो दिखाई देते हैं न रोशनी में ..
    वो उठकर रोशनी का स्विच बंद करना चाहती
    पर उंगलियां फिर रंग में डूब जातीं ....

    बेहद खूबसूरत................
    बधाई तूलिका जी.

    अनु

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  2. क्षितिज के एक कोने से दूसरे कोने तक
    बिखर जाते रंग ...इन्द्रधनुष से
    कुछ देर दोनों जादू बुनते ....
    पर रंग तो दिखाई देते हैं न रोशनी में ..
    वो उठकर रोशनी का स्विच बंद करना चाहती
    पर उंगलियां फिर रंग में डूब जातीं ....
    एक स्वप्निल रंग

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    1. आभार रश्मि जी ...ब्लॉग पर आने का शुक्रिया

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  3. कल 07/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. उसकी आँखों में बंद है एक इन्द्रधनुष ...
    वाह ...बेहतरीन भाव

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  5. तूलिका.......एक बारगी तो लगा कि जैसे ये निराशा और टूटन की कविता होगी लेकिन अंत तक पहुँचते हुए मुझे इसमें एक मासूम आशावाद दिखा.......रंग उड़े नहीं, निरर्थक नहीं हुए........एक ने रंगों को क्षितिज तक फैला दिया तो दूसरा उसे समेट कर रंगों का दरिया बहा देता है.........

    बहुत खूबसूरती से निबाहा है आपने रंगों की इस छुपम-छुपाई को......बहुत बधाइयाँ....

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    1. रंग कभी हमसे खेलते हैं और कभी हम रंगों से खेलने लगते हैं ...बस यही धूपछांव चलती है ज़िन्दगी भर ....शुक्रिया पसंद करने के लिए

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  6. उसकी आँखों में बंद है एक इन्द्रधनुष ...बेहतरीन भाव ... बहुत सुंदर रचना प्रभावशाली प्रस्तुति

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  7. बहुत खूब ... आँखों के इस इन्द्रधनुष कों संभाल के रखना ... जीवन में कई बार रंगों की कमी आ जाती है ...

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    1. आँखों के इस इन्द्रधनुष को संभाल कर ही रखा है दिगंबर जी .....शुक्रिया पसंद करने के लिए

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  8. उसकी आँखों में बंद है एक इन्द्रधनुष ...
    जबकि लड़के के हाथ
    अब भी उठे हैं ...
    दुआएं बिखेर रहे हैं !

    सुंदर भोली रचना...
    सादर।

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  9. क्या बात!!!!!.......बढ़िया

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  10. क्षितिज के एक कोने से दूसरे कोने तक
    बिखर जाते रंग ...इन्द्रधनुष से
    कुछ देर दोनों जादू बुनते ..........और बुनते एक खूबसूरत ,मीठी लुभावनी अर्थवान कविता | सुंदर लिखा छोटी |

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    1. भैया ! आपकी टिप्पणी हमेशा मुझे उत्साहित करती है ...शुक्रिया

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  11. लड़का अपने हाथ हवा में उठाता
    सारे रंग समेट लेता
    अपनी हथेलियों में ..
    सिद्धहस्त जादूगर की तरह
    रंगों का दरिया वापस बहा देता....

    क्षितिज के एक कोने से दूसरे कोने तक
    बिखर जाते रंग ...इन्द्रधनुष से
    कुछ देर दोनों जादू बुनते ....(सुन्दर है तेरी कल्पना के रंग !!)
    पता है तूलिका ...जादू अपने आप में कितना मन को मोहने वाला होता है जबकि हमें पता होता है कि यह छलावा है...मन का भरम है ..तब भी साथ हों तो वो जादू बुनना...झूठ का महल बनाना कितना सुखकर होता है .
    बंद आँखों का इन्द्रधनुष ...यूँ ही बना रहे
    दुआएं यूँ ही बरसती रहें ...तुम पर .
    रहमतों की बरसात होती रहे .....

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    1. जादू तो ऊपर वाला बुनता है ...हम तो जीवन भर उनमें रंग भरने की कोशिश करते रहते हैं ....हाँ! रहमतों को समेट लेना चाहती हूँ झोली भर के

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  12. आपके लेखनी बहुत खूबसूरत और सटीक होती है..वैसा ही कुछ यहाँ भी है..

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