सोमवार, 29 अक्तूबर 2012

संदेसे

















हवाओं पर रख दिए थे
भीगे हुए से कुछ स्वर
और बता दिया था
उसके कानों का पता भी
जैसे पता ही था तुम्हें
कि स्वर का अनुनाद
इतने गहरे निशान छोड़ेगा
कि कालखंडों के बीतने पर भी
ह्रदय पर अंकित रहेंगे
स्वर के जीवाश्म

दरिया के पानियों पर
उसने भी रख दिए थे
प्रतीक्षा के दो आंसू
जैसे मालूम था उसे
दरिया का रास्ता
समंदर तक
और तय करनी थी उसे ही
समन्दर में नमक की सांद्रता
कि इससे ठीक पहले
मीठा था समन्दरों का भी पानी .


5 टिप्‍पणियां:

  1. दरिया के पानियों पर
    उसने भी रख दिए थे
    प्रतीक्षा के दो आंसू
    जैसे मालूम था उसे
    दरिया का रास्ता
    समंदर तक
    और तय करनी थी उसे ही
    समन्दर में नमक की सांद्रता
    कि इससे ठीक पहले
    मीठा था समन्दरों का भी पानी ... वाह,बहुत ही बढ़िया

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  2. काश के प्रेम न होता....
    इंतज़ार न होता...
    आँखों में नमी न होती....

    और समंदर यूँ खारा न होता.....
    :-)
    अनु

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  3. behad shaandaar ...
    kavita wahi hai jo paathak ke man me picture(movie)ki tarah chale... phoolon ki aat ho to khushbu mahsoos ho chaand ki baat ho to chaandni khil uthe, dariya ki baat ho to qood ke dubki laga sake....
    aur ye saari khaasiyateiN mauzood hain aapki kavita me...
    mubaarak ho.

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  4. तूलिका की पहचान है...लफ़्ज़ों के माध्यम से खूबसूरत चित्र उकेर देना .
    चलो न..साथ..
    हाथों में लेकर हाथ
    ढूँढ लें मिलकर
    मीठे मीठे पानी के सोते
    हमारे प्यार सरीखे .

    मिठास तेरे चुम्बनों की
    घोलते हैं रिश्ते में
    नमक आंसुओं का
    शामिल कर देते हैं
    तेरी अदाओं में .
    बदल देते हैं .....
    ...सारी परिभाषाएं .
    समुद्र तक क्यूँ कर जाएँ
    जब जीने के सामान
    सब आस पास मिल जाएँ

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