शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

मुस्कुराहट का रंग



मुस्कुराहटों की उंगली थामे
दर्द को मिश्री सा घोलकर पी लिया

थोड़ा खिलखिला दोगे अगर

तो ख़्वाबों के मेरे कारवां पर

खुशियाँ बरस ही पड़ेंगी

ताज़ादम हो के चलना अच्छा लगेगा न
....

यूँ उदासियाँ न बिखेरा करो

चिपकी रहतीं हैं मन से तब तक

जब तक तुम खुद नहीं उतारते

आँखों का काजल फैलकर

बिखेर देता है अपना रंग
.....

थोड़ा सा मुहब्बत का लाल रंग भी

दे ही जाना अबकी बार

होठों पर सजाकर देखना है मुझे

कि मेरी मुस्कुराहटों में दिखता है क्या

किसी को तुम्हारा रंग
!




14 टिप्‍पणियां:

  1. मोहब्बत का रंग कभी छुपा है...
    ज़रूर दिखेगा जानेमन....
    <3

    अनु

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    1. हम्म ...इश्क छुपता नहीं छुपाने से :)

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  2. कल 04/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. रंग जरूर दिखता है ..
    चाहे जैसा भी हो ..
    सुंदर अभिव्‍यक्ति

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  4. खूबसूरत कविता को लफ़्ज़ों का सलाम ...

    तुम्हारी खुशी..मेरे जीने का संबल है .तुम खुश होते हो न ,तो मुझे अपने ग़म याद नहीं रहते.तुम्हारी प्रसन्नता जैसे जैसे गुणात्मक मोड में जाती है वैसे-वैसे मेरे सारे दुःख जैसे ऋणात्मक मोड में चले जाते हैं .जब तेरी खिलखिलाहट ..हँसी में बदलती है ..मुझे लगता है कोई है मेरे अंदर जो मुझे भी मुस्कुराने को कह रहा है और मेरे लबों पे मुस्कान सज जाती है.
    तुमसे मेरा रिश्ता ...बता न पाऊं शायद .पर,एक बात तो तय है कि तुम्हारी खुशी से मुझे मुस्कुराने की वजह मिल जाती है .ख़ुदा करे....तुम्हारी ज़िंदगी में यूँ ही तबस्सुम बिखरे रहें ..हमेशा .
    ज़्यादा खुश होने की ज़रूरत नहीं है ..ऐसा कुछ ख़ास नहीं है मेरे तुम्हारे बीच.तुम्हें खुश देखने के पीछे बस एक कारण है ...मेरा स्वार्थ .पूछो न...वो कैसे?वो ऐसे...कि मेरा मुस्कुराना भी तो तभी होगा न जब तुम मुस्कुराओगे .हुआ न मेरा स्वार्थ...

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  5. इश्क में डूबी कोमल भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति...
    वाह.....
    :-)

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  6. बेहद प्यारी कोमल सी रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. थोड़ा सा मुहब्बत का लाल रंग भी
    दे ही जाना अबकी बार
    होठों पर सजाकर देखना है मुझे
    कि मेरी मुस्कुराहटों में दिखता है क्या
    किसी को तुम्हारा रंग !
    ...एक खूबसूरत इल्तिजा ...ज़रूर क़ुबूल होगी :)

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