बुधवार, 4 अप्रैल 2012

बूमरैंग


















लड़की
बरसों से पचकुट्टे खेलती
हवा में उछालती
फिर हसरत से तकती
कोई गिट्टा ..
कोई पत्थर तो लाएगा
तोड़कर उसका आसमान .
पर लौट आते गिट्टे
उसकी हसरतों की तरह
खाली हाथ ...

आज विज्ञान पढ़ लिया है उसने
जानती है लड़की
कि गोलाकार वस्तु पर
गुरुत्व और घर्षण बल
सबसे कम लगता है ..इसलिए
आज उस लड़की ने
अपनी हसरतों की
छोटी और गोल गेंद
हवा में उछाली है
उहूँ .. हवा में नहीं
और ऊपर आसमान में.
पर आसमान भी हड़प गया
साजिशन ..उसकी गेंद

तकती आँखों में
बेबसी नहीं
हौसला रखती है वो ..
अब वो बूमरैंग बनाएगी
समेटेगी अपना पूरा जोश 
और पूरे आक्रोश का बल
अपने बाजुओं में ..
फिर फेंकेगी बूमरैंग पूरे जोर से
अभिमानी आकाश की ओर..
जो वापस आएगा
उतनी ही तेज़ी से
लौट कर उसके पास
साधकर लक्ष्य ..
लेकर उसके अपने हिस्से का
एक कतरा आसमान
और अंजुरी भर दुनिया .

3 टिप्‍पणियां:

  1. तूलिका....अच्छी सोच...पुख्ता विचार....बुलंद इरादे...नए ख्वाब ..संजोने वाली इस लड़की को मेरा सलाम.
    मुझे ..बोलना है इस से कि..अच्छा है इसने विज्ञान केवल इसलिए नहीं पढ़ा कि नंबर लाके पास होना है...बल्कि उसका इस्तेमाल भी बाखूबी जानती है...
    पता है तूलिका...बचपन याद आया ...वो बुमेरेंग याद आया .
    मैं चाहती हूँ कि हर किसी को उसके हिस्से का आसमान मिलें...अपनी अंजलि भर दुनिया मिले.....यह बात और है कि हरेक कि वो दुनिया ...उसकी चाहतें अलग-अलग हो सकती हैं...

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  2. जो वापस आएगा
    उतनी ही तेज़ी से
    लौट कर उसके पास
    साधकर लक्ष्य ..
    लेकर उसके अपने हिस्से का
    एक कतरा आसमान
    और अंजुरी भर दुनिया .
    .....बहुत सुन्दर तुलिकाजी .....बहुत ही प्रेरणादायक अभिव्यक्ति !!!

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