मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

स्मृतियों में मानचित्र



उदासी के चौरस्ते पर
आस वाली सड़क की ओर
झिलमिलाता है तुम्हारा रंग
कि इस राह की बजरी ने भी
ओढ़ लिया है तुम्हारा इंतज़ार.

शेष तीन रास्ते खींचते हैं
अनवरत अपनी ओर..
ओढ़ा देते हैं नया आसमान
बिछा देते हैं नयी ज़मीन,
सपनों की नयी सीढ़ियां खोल देते हैं.
पाँव तले आ जाता है क्षितिज
टंग जाते हैं चमकीले सितारे
इच्छाओं के आकाश पर..
प्रलोभन के सारे अवयव
मौजूद होते हैं पूरी तीक्ष्णता में
पर इंतज़ार की आँखें
किसी मंज़िल को नहीं छूतीं .

भले ही तुम न पहुँचो
किसी रास्ते से होकर
इस चौराहे तक..
मार्ग के तुम्हारे अवरोध
अलंघ्य हो जाएँ..
विस्मृत हो जाएँ तुम्हें
संसार के सभी चौराहे..
पर कोई उपेक्षित संवेदी तंतु
अवश्य होगा ऐसा
जो धड़कता होगा प्रतिक्रिया में ..
और तुम्हारी स्मृति के
किसी न किसी कोने में  
छपा ही होगा..
इस ओर आने का मानचित्र .










8 टिप्‍पणियां:

  1. इस आस की डोर से ही तो सांस की डोर बंधी है.....

    बहुत सुन्दर !!!

    अनु

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  2. आज की ब्लॉग बुलेटिन दिल दा मामला है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. तूलिका...तुम्हारे उस इंतज़ार...उस छटपटाहट ...उस सरापे को सलाम
    क्यूंकि उसकी वजह से इतनी सुन्दर कविता पढ़ने को मिली .

    झिलमिलाता ही होगा ...उसका रंग,आस वाली सड़क पर ....निःसंदेह .
    राह की बजरी ..का रंग सुन्दर रूपक है ...इंतज़ार के रंग से उसका साम्य,अच्छा लगा .
    दिक्कत तो यहीं हैं...न ...तूलिका
    बाक़ी तीन रास्ते कुछ कर दें...जान निकाल कर भी कदमों में बिछा दें ..पर,जब ,जिन रस्ते जाना ही नहीं ...तो कोई अंतर नहीं पड़ता.
    प्रलोभन काम नहीं करता....कुछ भावों पर.
    लंबी प्रतीक्षा और उसपर यह अगाध भरोसा .....यह जानलेवा कॉम्बो है .
    उसके संवेदी तंतु के प्रतिक्रया रत होने के इंतज़ार में....उसके मानचित्र का सहारा लेने की उम्मीद पर ....उसकी स्मृति द्वारा उपकृत होने की प्रतीक्षा में...........................

    तूलिका मार्का है,कविता....बधाई,बहुत दिनों बाद...तुम्हारी स्टाइल में तुम्हारा लिखा कुछ पढ़ने को मिला .

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  4. विस्मृत हो जाएँ तुम्हें
    संसार के सभी चौराहे..
    पर कोई उपेक्षित संवेदी तंतु
    अवश्य होगा ऐसा
    जो धड़कता होगा प्रतिक्रिया में ..

    सुंदर भावपूर्ण और संवेदनशील प्रस्तुति.

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  5. अद्भुत सौन्दर्य..गूढ़ रहस्य..

    बेजोड़ अभिव्यक्ति हर बार की तरह..!!

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