शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

दरवाज़े पर एक चेतावनी




कुछ दर्द ..सुलगते अंगार से
रखे हैं दिल में ....
उबल रहा है स्मृतियों का लावा
राख कर देने की हद तक
आकुल है परित्यक्त अंतस ..
वेदना की लपटों के हाहाकार से
धधक रहे हैं कुछ पल
अस्तित्व लील जाने को आतुर

मैंने भी दरवाज़े पर
चिपका दी है एक चेतावनी

फ़ना होने का दम रखना
तभी भीतर कदम रखना .

12 टिप्‍पणियां:

  1. फ़ना होने का दम रखना
    तभी भीतर कदम रखना .............वाह फ़ना तो हम पढ़कर ही होगये बेहद लाजवाब तुलिका ......!!

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    1. सरोज दी..... हौसला अफजाई का शुक्रिया ....आप लोगों को पढ़ कर जोर आज़माइश करते रहते हैं बस

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  2. फ़ना होने का दम रखना
    तभी भीतर कदम रखना .

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    1. तुम्हें कोई चेतावनी रोक सकती है भला

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  3. फ़ना होने का दम रखना
    तभी भीतर कदम रखना .....वाह!!
    तूलिका,अगर कोई अनपढ़ हो या...प्यार में अंधा हो..और उसे यह चेतावनी दिखे न...तब?

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    1. ओये ऐसे सवाल नहीं पूछे जाते ...वैसे पूछा है तो बता दूं .......आग लग जाएगी पूँछ में :D

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  4. kya khoob likha hai aapne.... wah... bahoot khub..

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